Friday, 31 July 2015

40/139-

चाहत मता खरीदणे दी, पर थैलू तेरा छोटा।
खाली हथें घरें आया, बटुएं नोट था खोटा।।
बटुएं नोट था खोटा, वेईमानी दी कमाई।
जे पसीना वहाया होंदा, हुंदी नी रुसवाई।
फले फुले सदा मेहनत, दिन्दी दिले जो राहत।
मंजे दिखी पैर पसारी, रख काबू अपणी चाहत।।


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