Friday, 24 July 2015

36/135-

चंदरी किस्मत नाच नचाये
झोंपड़ी कुथी महल वसाये

जन्म तै करे अमीरी गरीबी
भेदभाव ये समझ नी आये

येथु किता येथु भुगतना फिरी
गरीब वच्चा कुण रिण चुकाए

बिधना बड़े तेरे खेल नराले
चौपड़ी कुसीजो भुखा सुआये

'भगत' माणदार जगे च सैही
मौका वैमानी दा जो नी पाये



0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home