Friday, 31 July 2015

*45/31+45-

कुछ कांगड़ी कहावतां-भाग 2.

1.     थोडा थोडा खाइये तां
        फिरी भी चुली वली जाइये

2.     जिसदें हथें डोई
        उसदा सव कोई

3.    आया नी मुहयें
        ता लै वो नुहयें

4.     खांदेयां नी खांण
        मंजेयां नी वांण

5.     खंग करां खांसी करां
        नी मरां तां क्या करां

6.     न मडा मरे
        न मंजा छुटे

7.     या मारे जूठ
        या मारे झूठ

8.     नच्ची कुद्दी तोड़े तान
        सैहो दुनिया च प्रधान

9.     गौही जो मिल्ली गौह
        तदेही औह तदेही औह

10.   रागें भुल्ली रागण
         गांदी ज़ाल बताल

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